स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने प्रदेश में पीसीवी टीकाकरण का किया वर्चुअल शुभारंभ : छत्तीसगढ़ में अब बच्चों को निःशुल्क लगेगी न्युमोकोकल वैक्सीन

छत्तीसगढ़ में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों को अब न्युमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) निःशुल्क लगाया जाएगा। यह टीका बच्चों को न्युमोकोकल बैक्टीरिया से होने वाली निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर, सेप्टीसिमिया, साइनुसाइटिस, ओटाइटिस मीडिया (कान का इन्फेक्शन) जैसी कई बीमारियों से बचाएगी। शिशुओं को छह सप्ताह, 14 सप्ताह और नौ माह की आयु में इसकी तीन खुराकें दी जाएंगी। तीन डोज में लगने वाला यह टीका बाजार में काफी महंगे दामों में मिलता है। स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने आज एक वर्चुअल कार्यक्रम में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में पीसीवी टीकाकरण का शुभारंभ किया।

स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने कार्यक्रम में सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा विभाग के मैदानी अमले को संबोधित करते हुए कहा कि न्युमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन को नियमित टीकाकरण में शामिल करने से पांच वर्ष तक के बच्चों की न्युमोकोकल बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों से रक्षा हो सकेगी। इससे प्रदेश में बाल मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पीसीवी की महंगे दर पर उपलब्धता के कारण आम लोगों तक इसकी पहुंच सीमित थी। अब नियमित टीकाकरण में शामिल होने से सभी बच्चों को इसे निःशुल्क लगाया जा सकेगा।

श्री सिंहदेव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में पांच वर्ष से कम उम्र में जान गंवाने वाले बच्चों में से 13 प्रतिशत निमोनिया पीड़ित होते हैं। इनमें से भी 15 प्रतिशत बच्चों की मौत न्युमोकोकल निमोनिया से होती है। उन्होंने बताया कि देश में वर्ष 2010 में एक लाख पांच हजार और 2015 में 53 हजार बच्चों की मौत न्युमोकोकल निमोनिया से हुई हैं। श्री सिंहदेव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से पीसीवी को अधिक से अधिक शिशुओं तक पहुंचाने कहा। उन्होंने नवजातों के माता-पिता को भी इस बारे में जागरूक करने कहा जिससे वे शिशु की उम्र के अनुसार इसकी निर्धारित खुराक समय पर बच्चों को दिलवा सकें।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने शुभारंभ कार्यक्रम में कहा कि पांच वर्ष तक के बच्चे न्युमोकोकल बैक्टीरिया से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।   पीसीवी से इन बच्चों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जैपनीज इन्सेफेलाइटिस के ज्यादा खतरों वाले जिलों में इससे बचाव का टीका भी नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि कोरोना महामारी के बावजूद पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 94 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण किया गया है। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा मैदानी अमले की पीठ थपथपाते हुए कहा कि मुश्किल समय में भी वे अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने नए टीकों को भी अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने कहा।