News Flash

नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के दौरान 17 जवान शहीद,मुठभेड़ में घायल 15 जवानों का इलाज रायपुर में:मुख्यमंत्री ने सभी जवानों को बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज राजधानी रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल पहुंचकर वहां इलाज के लिए दाखिल जवानों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हालचाल पूछा । ये जवान कल सुकमा के पास हुई नक्सल मुठभेड़ में घायल हो गए थे ।

मुख्यमंत्री ने सभी जवानों को बेहतर से बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश डॉक्टरों को दिए है। कल के मुठभेड़ में घायल 15 जवानों का इलाज राजधानी रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल मैं चल रहा है, जिसमें दो जवान गंभीर हैं तथा 13 जवानों की स्थिति सामान्य है।

छत्तीसगढ़ के सुकमा में शनिवार को हुई मुठभेड़ में 17 जवान शहीद हो गए। मुठभेड़ के दौरान लापता हुए 14 जवानों के शव 20 घंटे बाद रविवार को मिले। तीन जवानों के शहीद होने की देर रात ही पुष्टि हो गई थी। यानी इस मुठभेड़ में कुल 17 जवान शहीद हो गए। इनमें 12 जवान डीआरजी के और पांच एसटीएफ के हैं। नक्सली 12 एके-47 समेत 15 हथियार भी लूटकर ले गए। बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इसकी पुष्टि की है।

पुलिस को कसालपाड़ इलाके में बड़ी संख्या में नक्सलियों के जमा होने की खबर मिली थी। इसके बाद डीआरजी, एसटीएफ ओर कोबरा के 550 जवान शुक्रवार को दोरनापाल से रवाना किए गए। बताया जा रहा है कि जवान नक्सलियों को सरप्राइज एनकाउंटर में फंसाना चाह रहे थे, लेकिन नक्सलियों तक यह खबर पहले ही पहुंच गई। नक्सलियों ने रणनीति के तहत जवानों को जंगलों के अंदर तक आने दिया।

एंबुश लगाकर नक्सलियों ने जवानों को फंसाया
जवान कसालपाड़ के आगे तक गए और जब नक्सली हलचल नहीं दिखी तो वे लौटने लगे। जैसे ही सुरक्षा बल कसालपाड़ से निकले, शाम करीब 4 बजे नक्सलियों के लगाए एंबुश में फंस गए। कसालपाड़ से कुछ दूर कोराज डोंगरी के पास नक्सलियों ने पहाड़ के ऊपर से जवानों पर हमला बोल दिया। अचानक हुई गोलीबारी में कुछ जवान घायल हो गए। अचानक हुए इस हमले से जवानों को संभलने का मौका नहीं मिला।

कई नक्सलियाें के भी मारे जाने का दावा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मुठभेड़ में कई नक्सली भी मारे गए हैं। 14 घायल जवानों को रायपुर में भर्ती किया गया है। इनमें से दो जवानों की हालत नाजुक है। बताया जा रहा है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि जब डीआरजी के जवानों को इतनी बड़ी संख्या में निशाना बनाया गया हो। पुलिस की डीआरजी फोर्स में सरेंडर नक्सलियों और स्थानीय युवाओं को शामिल किया जाता है। इसके चलते वे बस्तर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ होते हैं। उन्हें स्थानीय बोली भी आती है। वे अन्य सुरक्षा बलों के अगुआ होते हैं।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कल सुकमा जिले में नक्सल मुठभेड़ में जवानों की शहादत पर गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घटना में घायल जवानों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

Leave a Reply